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15अगस्त के शुभ अवसर पे जनकवि महेश ठाकुर की एक सुन्दर रचना :- हाथ से हाथ मिलने से कुछ ना हुआ
जनकवि महेश ठाकुर चकोर बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के रहने वाले है जिन्होंने भोजपुरी हिंदी के बहुत सारे रचनयो से लोगो को प्रेरणा प्रदान की आज इस स्वतंत्रा दिवस के शुभ अवसर पे उन्होने आपने देश वाशियो को अपनी एक रचना समर्पित किया है .
हाथ से हाथ मिलने से कुछ ना हुआ
दिल से दिल को मिलाने की कोशिश करो
जात-मज़हब से बदबू निकलने लगी
इसे मिट्टी दिलाने की कोशिश करो
हाथ——
क्यारियां जितनीं हैं ,उनमें काँटें खिले
फूल जितने हैं,उनमें ज़हरे हैं मिले
काँट उगे न मिले,ज़हरे फूल में
वैसी तकनीक पाने की कोशिश करो
हाथ—–
जहाँ खुशियां हैं,खुशियां बरसातीं वहीं
किसी इनसां को लगता ये वाज़िब नहीं
कूकी कोयल न बहार आई जहाँ
वहाँ कलियां खिलाने की कोशिश करो
हाथ——
अश्क़ सदियों से आँखों में जिनकी भरे
ज़ुर्म पे ज़ुर्म हैवान उनपे करे
तूँ हो इंसान तो,इनसां के लिए
अपनी गर्दन कटाने की कोशिश करो
हाथ——-
धर्म के नाम पे,है तिज़ारत शुरू
देखो नफरत शुरू है वो दहशत शुरू
लूट चारो तरफ़ क़तल चारो तरफ़
उससे बचने बचाने की कोशिश करो
हाथ——–
महेश ठाकुर चकोर
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