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शिक्षा और चिकित्सा के बाद अब कला के क्षेत्र में पहचान बना रहे हैं म़दुल शरण

शिक्षा और चिकित्सा के बाद अब कला के क्षेत्र में पहचान बना रहे हैं म़दुल शरण
शिक्षा और चिकित्सा के बाद अब कला के क्षेत्र में पहचान बना रहे हैं म़दुल शरण

शिक्षा और चिकित्सा के बाद अब कला के क्षेत्र में पहचान बना रहे हैं म़दुल शरण

मृदुल शरण ने शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में शानदार पहचान बनाने के बाद अब कला के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनायी है। झारखंड के दुमका जिले में जन्में मृदुल शरण के पिता श्री रणणी विलास शरण प्रोफेसर और मां श्रीमती कुसुम शरण शिक्षिका थी। उनके माता-पिता उन्हें प्रोफेसर बनाना चाहते थे हालांकि उनकी रूचि बचपन के दिनों से कला की ओर थी। मृदुल शरण ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मोतिहारी स्थित अपने ननिहाल में रहकर पूरी की। उन्होंने इंटमीडियट की पढ़ाई एम एस कॉलेज से पूरी की। मृदुल शरण महानायक अमिताभ बच्चन से काफी प्रभावित थे और उन्हीं की तरह अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की ख्वाहिश रखा करते।

मृदुल शरण स्कूल और कॉलेज में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया करते थे जिसके लिये उन्हें काफी शोहरत भी मिलती। इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद मृदुल शरण मुजफ्फरपुर चले गये जहां उन्होंने एल एस कॉलेज से स्नाकोत्तर तक की पढ़ाई पूरी की। मृदुल शरण ने अपने करियर की शुरूआत जी जे कॉलेज बिहटा में मनोविज्ञान प्रोफेसर के रूप में की। चार साल तक यहां काम करने के बाद उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी। इनकी शादी मनोविज्ञान की व्याख्याता श्रीमती अनीता शरण से हुई। इसके बाद मृदुल शरण ने फार्मा कंपनी युनिवर्सल में रीजनल सेल्स मैनेजर के तौर पर 12 साल तक काम किया। बाद में उन्होंने अपनी खुद की मेडिसीन रिटेल शॉप खोली।

मृदुल शरण कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते थे। इसी को देखते हुये आंखो में बड़े सपने लिये वह वर्ष 2017 में मायानगरी मुंबई आ गये और संघर्ष शुरू किया। मृदुल शरण् की मेहनत रंग लायी और उन्हें भोजपुरी फिल्म जुल्म की जंजीर में बतौर लेखक काम करने का अवसर मिला। बाला साहब प्रोडक्शन के बैनर तले बनी इस फिल्म में मृदुल शरण ने अभिनय भी किया है। फिल्म में रूपा सिंह अयाज खान और गोपाल राय ने मुख्य भूमिका निभायी है। इसके बाद मृदुल शरण ने मराठी फिल्मों में भी अभिनय किया। मृदुल शरण की भोजपुरी फिल्म काजल हाल ही में प्रदर्शित हुई है। महिला सशक्तीकरण पर आधारित इस फिल्म में काजल यादव ने मुख्य भूमिका निभायी है।
फिल्म में मृदुल शरण ने कॉलेज के प्रिंसिपल की भूमिका निभायी और अपने शानदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। मृदुल शरण ने बताया कि आज भोजपुरी फिल्मों ने अपनी सभ्यता और संस्कृति की गरिमा को खो रही है जो निश्चित रूप से चिंता की विषय है। हालाँकि ऐसे भी फिल्में हैं जो इसके संस्कृति और सभ्यता की मर्यादा को धुमिल नहीं होने दिया। हाल के समय में भोजपुरी फिल्मों में अश्लीलता हावी हो गयी है लेकिन फिल्म काजल परिवार के साथ बैठकर देखने वाली फिल्म है।

मृदुल शरण ने बताया कि उनकी आने वाली फिल्मों में कसम बा चंपारण के , उडन तस्करी ,चवन्नी छाप खोटे सिक्के , सात शहीद और अनोखी मोहब्बत प्रमुख है। उनका अलबम सनम मेरा बेवफा निकला काफी लोकप्रिय साबित हुआ है। मृदल शरण भोजपुरी माटी से जुड़े कलाकार हैं और उनकी ख्वाहिश है बिहार सरकार भोजपुरी फिल्मों और उसके कलाकारों के लिए कोई ठोस योजना बनाए और भोजपुरी फिल्मों के लिए कुछ समारोहों का आयोजन करें ।

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