Entertainment News

फिल्म स्टार डॉ. महेश कुमार, लेखक ​डॉ. अतुल पाटणे (आईएएस) और निर्माता डॉ. एस वी अंचन की ‘भोज’ ने सिनेमाघरों में मचाई धूम

फिल्म स्टार डॉ. महेश कुमार, लेखक ​डॉ. अतुल पाटणे (आईएएस) और निर्माता डॉ. एस वी अंचन की 'भोज' ने सिनेमाघरों में मचाई धूम
फिल्म स्टार डॉ. महेश कुमार, लेखक ​डॉ. अतुल पाटणे (आईएएस) और निर्माता डॉ. एस वी अंचन की 'भोज' ने सिनेमाघरों में मचाई धूम

डॉ. महेश कुमार, यामिनी सिंह, निर्माता डॉ. एस वी अंचन, लेखक डॉ. अतुल पाटणे (आईएएस) की फिल्म ‘भोज’ सिनेमाघरों में हुई रिलीज

फिल्म स्टार डॉ. महेश कुमार, लेखक ​डॉ. अतुल पाटणे (आईएएस) और निर्माता डॉ. एस वी अंचन की ‘भोज’ ने सिनेमाघरों में मचाई धूम

फिल्मस्टार डॉ. महेश कुमार और भोजपुरी सिनेमा की मोस्ट पॉपुलर एक्ट्रेस यामिनी सिंह के शानदार अभिनय से सजी भोजपुरी फिल्म ‘भोज’ उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। प्रख्यात निर्माता डॉ. एस.वी. अंचन द्वारा निर्मित और लेखक डॉ. अतुल पाटणे (आईएएस) द्वारा लिखित भोजपुरी फिल्म ‘भोज’ को सिनेमाघरों में बहुत पसंद किया जा रहा है। एक्टर डॉ. महेश कुमार और एक्ट्रेस यामिनी सिंह की ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों का दिल जीत रही है और खूब मनोरंजन कर रही है। गौरतलब है कि इस फिल्म का ट्रेलर पहले ही वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया जा चुका है।

ये फिल्म न केवल सिनेमाई दृष्टिकोण से प्रभावशाली है, बल्कि सामाजिक संदेश के मामले में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। सेफसी अंचन ग्रुप के बैनर तले निर्मित इस फिल्म का स्क्रीनप्ले और डायलॉग अनिल विश्वकर्मा ने लिखा है। फिल्म के कुशल निर्देशन में क्रिएटिव डायरेक्टर के रूप में धीरू यादव ने अपना महत्वपूर्ण तकनीकी योगदान दिया है। निर्देशक चंदन सिंह हैं। फिल्म में मुख्य भूमिका में डॉ. महेश कुमार, यामिनी सिंह, अवधेश मिश्रा, राम सुजान सिंह, महेश आचार्य, समर्थ चतुर्वेदी, तमन्ना मौर्य, सुबोध सेठ और मनोज द्विवेदी आदि हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ एस वी अंचन द्वारा निर्मित, डॉ अतुल पाटणे (आई ए एस) द्वारा लिखित फिल्म भोज के जरिये फिल्मस्टार डॉ महेश कुमार ने भोजपुरी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलवाने के लिए भोजपुरी समाज से अपील की है, और सिग्नेचर कैंपेन के तौर पर मिस कॉल नंबर 91751 48038 जारी किया है। यह मिस कॉल न केवल फिल्म के समर्थन का प्रतीक है, बल्कि यह उन लाखों लोगों की सहमति है जो भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए कृतसंकल्प हैं