Entertainment News

फिल्म “एकांगी अंतरात्मा” को लेकर अभिनेत्री सुमन पांडेय ने साझा किया अपना अनुभव।

फिल्म "एकांगी अंतरात्मा" को लेकर अभिनेत्री सुमन पांडेय ने साझा किया अपना अनुभव।
फिल्म "एकांगी अंतरात्मा" को लेकर अभिनेत्री सुमन पांडेय ने साझा किया अपना अनुभव।

फिल्म “एकांगी अंतरात्मा” को लेकर अभिनेत्री सुमन पांडेय ने साझा किया अपना अनुभव।

मुंबई : हाल ही में सांवरे फिल्म्स के बैनर तले बनी फिल्म एकांगी अंतरात्मा वीआईएक्स डिजिटल ओटीटी पर रिलीज हुई हैं। जो दर्शकों को काफी पसंद आ रही हैं। अभिनेत्री सुमन पांडेय ने फिल्म के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा प्रेम कृष्ण का दिया हुआ भाव हैं। भाव में भगवान रहते हैं और भगवान में मिलावट नहीं होती हैं। भाव कृष्ण जैसा ना हो तो परमात्मा में विलीन हो जाता है। प्रेम सबसे ऊपर हैं। जो वासनाओं से परे प्रेम का मान रखते हैं, वैसे लोगों को सम्मान देती हूं। प्रेम सिर का ताज होता है और ताज के मान का सम्मान रखा जाता है।

आगे उन्होंने ईश्वर को लेकर अपना विचार प्रकट किया। कहा कि मेरे लिए मेरा प्रेम, ईश्वर और माँ कृष्ण ही हैं। मेरे मृत्यु के बाद भी वही रहेंगे।
फिल्म को लेकर उन्होंने कहां की वैसे तो पूरी फिल्म ही मेरे दिल के बहुत करीब है। लेकिन, मुझे एक डायलॉग बार-बार हिट होता है। सांसें कम हो गईं, मौत लंबा रास्ता बन गई। यह डायलॉग इतना गहरा है कि बोलते ही आप महसूस करने लगते हैं। मैं फिल्म के किरदार में इतना घुल गई थी कि ऐसा लगने लगा था कि ये मेरी कहानी चल रही है। बहुत बार ऐसा हुआ कि इमोशनल सीन में मैं फुट – फुट कर रोने लगती थी। मैंने उन दिनों अजीब सी पीड़ा महसूस किया। मेरा दिल उस किरदार को अपना समझने लगा था। उस किरदार से बाहर आने में मुझे वक्त लगा। शूट के लंबे समय तक मैं यहीं सोचती रही कि मैं कुंडली हूं, जो फिल्म का किरदार है।