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शिक्षित राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कायस्थ समाज की उपेक्षा क्यों : राजीव रंजन

शिक्षित राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कायस्थ समाज की उपेक्षा क्यों : राजीव रंजन
शिक्षित राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कायस्थ समाज की उपेक्षा क्यों : राजीव रंजन

शिक्षित राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कायस्थ समाज की उपेक्षा क्यों : राजीव रंजन

ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस के सौजन्य से “ पूछता है कायस्थ ” सत्र का आयोजन

 

नयी दिल्ली, 12 जुलाई । कायस्थों को धीरे – धीरे राजनीति में महत्वपूर्ण भागीदारी से वंचित किए जाने के विरोध में समाज ने अब अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है । इसी सिलसिले में सांस्कृतिक, शैक्षणिक, सामाजिक और राजनीतिक उत्थान के लिए संकल्पित विश्वस्तरीय संगठन ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) के सौजन्य से “ पूछता है कायस्थ ” सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें कायस्थों के हर क्षेत्र में विकास के अलावाराष्ट्रीय प्रांतीय स्तर पर राजनीति में कायस्थों की उपेक्षा के सवाल पर विस्तृत तौर पर चर्चा की गयी।

जीकेसी के सौजन्य से कायस्थ समाज के सर्वांगीण विकास को लेकर वर्चुअल सत्र “ पूछता है कायस्थ ” का आयोजन किया गया जिसमें बतौर मुख्य अतिथि पूर्व रेल राज्यमंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमिटी सदस्य भक्त चरण दास को आमंत्रित किया गया। सत्र के दौरान उन्होंने विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखी , वहीं उन्होंने कायस्थ समाज से जुड़े लोगों के सवालों के जवाब दिये। वर्चुअल सत्र में मॉडरेटर के रूप में जीकेसी राजनीतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिहिर भोले और राजस्थान जीकेसी के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग सक्सेना मौजूद थे।

सत्र का संचालन जीकेसी डिजिटल-तकनीकी के ग्लोबल अध्यक्ष आनंद सिन्हा, डिजिटल-तकनीकी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन श्रीवास्तव एवं डिजिटल-तकनीकी के ग्लोबल महासचिव सौरभ श्रीवास्तव ने निभायी। इस अवसर पर जीकेसी के विभिन्न राज्यों एवं अनेक देशों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। उन्होंने एक स्वर में कहा कि कायस्थ समाज क्षमता, मेधा, योग्यता, संख्या बल एवं तमाम सकारात्मक गुण होने के बाद भी पिछड़ता चला जा रहा है। इसके कहीं ना कहीं जिम्मेदार हम ही हैं। यदि कायस्थ समाज समय रहते अब नहीं चेता तो पिछड़ता चला जाएगा।

बिहार , मिजोरम और मणिपुर एआईसीसी प्रभारी भक्त चरण दास ने कहा कि समाज में कायस्थों का स्थान हमेशा रहा है। मंडल आयोग के बाद, धार्मिक प्रतिद्वंद्विता पैदा हुई। हमेशा कायस्थों को बांटने की कोशिश की गई और कायस्थ अब अपनी सफलता के पथ से दूर हो गए हैं। कायस्थों को भी न्याय की आवश्यकता होती है, जिसके लिए सभी कायस्थों को हाथ मिलाकर पूर्वव्यापी समीक्षा करने की आवश्यकता है। कायस्थ कोई जाति नहीं बल्कि सफलता का सूत्र है, जहां वे हमेशा चीजों को होने में विश्वास रखते हैं। मुझे विश्वास है कि कायस्थ एक नई शुरुआत कर सकते हैं और इतिहास रच सकते हैं क्योंकि वे हमेशा समाज में सबसे आगे चलने वाले रहे हैं।कायस्थों ने राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ संविधान निर्माण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह समाज दबे कुचले वर्ग, पिछड़ी जातियां, अल्पसंख्यक समुदाय के साथ समाज के अन्य समुदायों के उत्थान में अपनी अग्रणी भूमिका का निर्वहन करते आया है। कायस्थ समाज को किसी भी राजनीतिक दल का पिछलग्गू बनना बंद कर देना चाहिए।

जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कायस्थ समाज एक प्रबुद्ध समाज है। कायस्थ समाज एक सामाजिक एवं प्रगतिशील समाज है। इस समाज ने सदैव ही समाज के हर वर्ग और समुदाय को साथ लेकर चलने, उनका उत्थान करने का काम किया है। कायस्थ समाज ने सत्ता के संचरण के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है।

उन्होंने कहा कि महाराज ललितादित्य, महाराज प्रतापादित्य ने अपने नेतृत्व से राष्ट्र को नई दिशा देने का काम किया है। सुभाष चंद्र बोस, चितरंजन दास, सूर्यसेन समेत अनेक कायस्थ स्वतंत्रता सेनानियों ने अनेक अवसरों पर स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों से लोहा लेने का काम किया है। फिर भी इतिहासकारों ने हमेशा से कायस्थ समाज के योगदान और भूमिका के साथ छल करने का काम किया है। कायस्थ एक वैश्विक समूह है और इस देश में ही नहीं कायस्थ यूएसए, यूके समय अनेक देशों के साथ-साथ नासा, सिलिकॉन वैली में भी महत्वपूर्ण स्थानों पर है और अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहा है।
राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि भारतवर्ष का स्वर्णिम इतिहास चाहे वह प्राचीन, मध्य इतिहास हो या आधुनिक इतिहास ,साक्षी है कायस्थ समाज की विभूतियों के योगदान की कोई अनदेखी नहीं कर सकता है। देश के पहले राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद और दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री कायस्थ थे। बिहार के गौरवशाली निर्माण में कायस्थ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हमारे गौरवशाली इतिहास में राजा महाराजा ही नही , शिक्षाविद , न्यायविद, प्रतिभाशाली पत्रकार , चिकित्सक, कलाकार,या यूं कहें कि हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन देने वाले एक से एक कुल विभूति हुये हैं। आज हमें अपनी समृद्ध जनसंख्या को एकजुटकर के इतिहास गढ़ने की क्षमता को समझना होगा।अपने कुल और पूर्वजों के गौरवमयी इतिहास से प्रेरित होते हुए राजनैतिक तौर पर भी चैतन्य होने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का प्रारम्भ अनुराग सक्सेना ने किया । उन्होंने कहा, कायस्थ समाज को विभिन्न राजनैतिक दलों की उपेक्षा ने इस तरह क्षुब्ध किया है कि समाज यह सोचने को मजबूर है कि आख़िर इसका क्या कारण है? पूछता है कायस्थ एक मंच है जहाँ सभी दलों के प्रतिनिधि नेतागण अपना विचार रखेंगे और समाज अपने सशक्तिकरण से जुड़े प्रश्न उनके समक्ष उपस्थित करेगा। कायस्थ समाज इतना विवेकशील है कि वह चयन कर सके कि क्या देश और समाज के लिए उपयुक्त है, कौन विश्वास योग्य है और किसके पक्ष में खड़ा होना समाज के हित में है । हमें लक्ष्यभेद का ज्ञान है, इसलिए अब यह अभियान नहीं रुकेगा, लक्ष्य तक पहुँचने के पूर्व कोई विश्राम नहीं होगा। सत्ता में आने पर हिस्सेदारी से लेकर, संगठन और टिकिटों की दृष्टि से कायस्थ समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए आवश्यक रोड मैप भी बताना चाहिए ।

श्री भोले ने कहा, आज इस बात को बड़ी गम्भीरता से महसूस किया जा रहा है की कायस्थ भारतीय राजनीति में उपेक्षा के शिकार हो रहे है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर कुछ दशकों पहले तक भारतीय राजनीति के पटल पर हमारी उपस्थिति और पहचान दोनों क़ायम थी। कायस्थ, जिन्होंने भारतीय संविधान को बनाने से लेकर देश क सामाजिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, प्रशासनिक सभी क्षेत्रों में अपना भरपूर योगदान दिया आज राजनैतिक हाशिए पर है। तो क्या हम इस काबिल नहीं कि देश की मौजूदा राजनैतिक प्रक्रिया के भागीदार हों और असेम्बली, पार्लियामेंट, अन्य इलेक्टेड बोडीज या फिर राजनैतिक पार्टियों के संगठन के पदों के लिए नामित किए जाएँ? ये पूछता है कायस्थ।

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Ankit Piyush

Ankit Piyush is the Editor in Chief at BhojpuriMedia. Ankit Piyush loves to Read Book and He also loves to do Social Works. You can Follow him on facebook @ankit.piyush18 or follow him on instagram @ankitpiyush.

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