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हार निर्माता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का पटना में बने स्मारक : कमल किशोर

हार निर्माता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का पटना में बने स्मारक : कमल किशोर
हार निर्माता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का पटना में बने स्मारक : कमल किशोर

हार निर्माता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का पटना में बने स्मारक : कमल किशोर

कहा—स्मारक नहीं होना इतिहास के साथ अन्याय

पटना। ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष-सह-राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी कमल किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर बिहार के निर्माता और संविधान सभा के प्रथम अधिवेशन के अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा की स्मृति को जीवंत बनाये रखने के लिए राजधानी पटना में स्मारक स्थल के निर्माण और उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस महान व्यक्ति से नि:शुल्क मिली जमीन पर विधानसभा, सचिवालय एवं हवाई अड्डा समेत कई बड़े सरकारी भवन- संस्थान बने, जिसने बिहार के निर्माण से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन, शिक्षा, पत्रकारिता, राजनीति और संविधान निर्माण तक में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, उनका पटना में कोई स्मारक एवं आदमकद प्रतिमा नहीं होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह स्थिति बिहार की आने वाली पीढ़ी को इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय से वंचित करती है।

श्री किशोर ने कहा कि डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ऐसी विभूति थे, जिनका जीवन बिहार के निर्माण और राष्ट्र के विकास के अनेक महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़ा रहा। उन्होंने कलकत्ता, इलाहाबाद और पटना उच्च न्यायालयों में वकालत की। पत्रकारिता में ‘बिहार टाइम्स’, ‘बिहारी’ और ‘हिंदुस्तान रिव्यू’ का संपादन किया तथा 1918 में ‘द सर्चलाइट’ की स्थापना की। बिहार को अलग प्रांत बनाने के आंदोलन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। जनजागरण, हिंदू-मुस्लिम एकता और अंग्रेजी शासन पर दबाव के प्रयासों के परिणामस्वरूप 1 अप्रैल 1912 को बिहार-उड़ीसा प्रांत का गठन हुआ। उन्हें बिहार निर्माता के साथ-साथ आधुनिक बिहार के प्रमुख वास्तुकारों में माना जाता है। वे बिहार प्रांतीय कांग्रेस समिति के सचिव और अध्यक्ष रहे।

1910 से केंद्रीय विधान परिषद के सदस्य, 1921 में केंद्रीय विधानसभा के प्रथम उपाध्यक्ष, बिहार-उड़ीसा विधान परिषद के अध्यक्ष और प्रांत के प्रथम भारतीय वित्त सदस्य रहे। 1936 से 1944 तक पटना विश्वविद्यालय के कुलपति रहे और पत्नी राधिका की स्मृति में सिन्हा पुस्तकालय की स्थापना की। 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा के प्रथम अधिवेशन में सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के कारण उन्होंने अस्थायी अध्यक्ष की भूमिका निभाई। दो दिन बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए। 1950 में डॉ. सिन्हा ने संविधान पर हस्ताक्षर किए। 6 मार्च 1950 को पटना में उनका निधन हुआ। कमल किशोर ने कहा कि वकील, पत्रकार, शिक्षाविद्, प्रशासक, समाजसेवी और बिहार निर्माता के रूप में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा की विरासत को पटना में स्मारक और आदमकद प्रतिमा के माध्यम से सम्मान देना राज्य के इतिहास के प्रति सम्मान होगा । साथ ही वर्तमान और आने वाली पीढ़ी बिहार निर्माता डा. सिन्हा से प्रेरणा ले सकेगी

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Ankit Piyush

Ankit Piyush is the Editor in Chief at BhojpuriMedia. Ankit Piyush loves to Read Book and He also loves to do Social Works. You can Follow him on facebook @ankit.piyush18 or follow him on instagram @ankitpiyush.