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साक्षात्कार : पत्थर के सनम के निर्देशक नीरज रणधीर के मन के भाव, अनसुनी कहानी उन्हीं की जुबानी

पत्थर के सनम के निर्देशक नीरज रणधीर के मन के भाव, अनसुनी कहानी उन्हीं की जुबानी
पत्थर के सनम के निर्देशक नीरज रणधीर के मन के भाव, अनसुनी कहानी उन्हीं की जुबानी
साक्षात्कार : पत्थर के सनम के निर्देशक नीरज रणधीर के मन के भाव, अनसुनी कहानी उन्हीं की जुबानी

कल 28 जून  से अरविन्द अकेला कल्लू का धमाल पत्थर के सनम

सवाल : आज आपकी पत्थर के सनम रिलीज हो रही है, हम कुछ परिचर्चा कर लेते हैं?
जवाब:  जी हां, जरूर! अब जब पत्थर के सनम को रिलीज होने में महज चंद घंटे बचे हैं तो इस मुलाकात में सिर्फ पत्थर के सनम की बात होगी। लेकिन फिल्म के संदर्भ में बात करने से पहले फ़िल्म के प्रोड्यूसर के संदर्भ में बात करनी अहम है, क्योंकि इस फ़िल्म के बनने की कहानी वहीं से शुरू होती है। जब हमारी प्रोड्यूसर साहब से बात हुई तो उन्होंने कहा कि हम लोग एक अच्छी भोजपुरी फ़िल्म बनाते हैं। तब मैंने अनायास ही पूछ लिया कि आप जब हिंदी से लेकर किसी भी भाषा में फ़िल्म बनाने में हर तरह से सक्षम हैं तो आप भोजपुरी में ही फ़िल्म क्यों बनाना चाहते हैं। तब उन लोगों ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि हम जब अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फ़िल्मों की तुलना में भोजपुरी फिल्मों के संदर्भ में नकारात्मक बाते सुनते हैं तो हमें अच्छा नहीं लगता। इसलिए हम चाहते हैं कि अपनी भाषा भोजपुरी में अच्छी फिल्म बनाएँ ताकि भोजपुरी सिनेमा उद्योग को कुछ कंट्रीब्यूट कर सकें। तो इन विचारों के साथ उन्होंने इस फिल्म की नींव डाली।
सवाल : यह तो बहुत अच्छी बात हैं, प्रोड्यूसर साहब बधाई के पात्र हैं। हम पत्थर के सनम पर भी कुछ चर्चा कर लें ?
जवाब : हां जी! अब आते हैं पत्थर के सनम फ़िल्म के संदर्भ में। हो सकता है कि इस फ़िल्म में कुछ कमियां हों , लेकिन फ़िल्म में मनोरंजन की कोई कमी नहीं है। इसकी गीत संगीत की बात की जाय तो भोजपुरी सिने उद्योग के दो दिग्गज संगीतकार रजनीश मिश्रा और छोटे बाबा ने बेहतरीन गायकों एवं गीतकारों के साथ कमाल का गीत-संगीत दिया  है, जो आम और ख़ास सबको पसंद आ रहा है। वरिष्ठ सिनेमेटोग्राफर आर.आर. प्रिंस जी की टीम ने तकनीकी पक्ष में बेहतरीन काम किया है। तो वहीं अभिनय में कलाकारों ने मील के पत्थर कायम किये हैं। नायक अरविन्द अकेला कल्लू ने एक संस्कारी, संघर्षशील युवा के चरित्र को यादगार बना दिया है, तो वहीं नवोदित नायिका यामिनी सिंह ने अपनी पहली ही फ़िल्म में सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आगाज़ अगर ये है तो अन्जाम क्या होगा? और रही बात अवधेश मिश्रा जी की तो मैं एक ही बात कहूंगा कि भोजपुरी सिनेमा को इतराने का हक है कि उसके पास अवधेश मिश्रा है।
पत्थर के सनम में तो उन्होंने कई शेड्स के चरित्रों को ऐसा साकार किया है कि नई पीढ़ी के अभिनेताओं के लिए उनका यह प्रदर्शन नज़ीर बन गया है। संजय महानन्द जी ने साबित कर दिया है कि वो सिर्फ एक हास्य अभिनेता ही नहीं बल्कि एक सम्पूर्ण अभिनेता हैं। प्रेम दूबे का परिपक्व अभिनय एक अलग ही रंग में है। देव सिंह ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि भोजपुरी सिनेमा जगत में भी भी नायाब रत्न हैं। मटरू जी जोकि अपने चुटीले संवादों से दर्शकों को हँसाते आये हैं, इस फिल्म में खामोश और संवेदनशील अभिनय करके दर्शकों को रोने पर मजबूर कर दिये हैं। दीपक सिन्हा, रूपा सिंह, अनिता रावत, सुबोध सेठ, मतलब मुख्तसर तौर पर यह कह लीजिए कि हर कलाकार ने अपनी प्रतिभा का शत प्रतिशत प्रदर्शन इस फ़िल्म में किया है। यहां तक कि अतिथि कलाकार के रूप में यश कुमार और ऋतु सिंह ने भी अपने अभिनय की अदभुत छटा बिखेरी है।
सवाल: अंत में आप अपने क्या भाव व मन के उद्गार व्यक्त करना चाहेंगे?
जवाब: अंत में यही कहूंगा कि फ़िल्म की सारी टीम के अथक मेहनत ने इस फ़िल्म को एक अच्छी फिल्म में शुमार कराया है। यह फ़िल्म इस संदेश को प्रेषित करती है कि दुनिया का सबसे बड़ा पाप है एक पिता के द्वारा अपने संतानों के बीच बेटा बेटी का फ़र्क करना। इस पाप का कोई  प्रायश्चित नही है। अंत में इस फ़िल्म के निर्देशक होने के नाते मैं नीरज रणधीर आप दर्शकों से एक ही अनुरोध करूँगा कि पत्थर के सनम हमने पूरे दिल से बनाई है और पूरी कोशिश की है कि यह आपका दिल जीत सके। तो एक बार आप थिएटर में जाके यह फ़िल्म ज़रूर देखिए। अंत में मैं अपने उन शुभचिंतकों को भी शुक्रिया अदा करना चाहूंगा जिन्होंने हमारी तरफ से पत्थर के सनम फ़िल्म को देखने की अपील दर्शकों से की है।

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Ankit Piyush

Ankit Piyush is the Editor in Chief at BhojpuriMedia. Ankit Piyush loves to Read Book and He also loves to do Social Works. You can Follow him on facebook @ankit.piyush18 or follow him on instagram @ankitpiyush.

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