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शिक्षा के साथ ही फैशन और मीडिया के क्षेत्र में भी खास पहचान बनायी स्मिता गुप्ता ने

BHOJPURI MEDIA

ANKIT PIYUSH 

शिक्षा के साथ ही फैशन और मीडिया के क्षेत्र में भी खास पहचान बनायी स्मिता गुप्ता ने

वक़्त से लड़कर जो अपना नसीब बदल दे,
इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे,
कल क्या होगा कभी ना सोचो,
क्या पता कल वक़्त खुद अपनी लकीर बदल दे।

 

अपनी हिम्मत और लगन के बदौलत स्मिता गुप्ता आज शिक्षा के क्षेत्र के साथ ही फैशन-मॉडलिंग और मीडिया के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुयी है लेकिन इन कामयाबियों को पाने के लिये उन्हें अथक परिश्रम
का सामना भी करना पड़ा है। दुनिया के सबसे बेहतरीन और मशहूर लोग वो होते है जिनकी अपनी एक अदा होती है…. वो अदा जो किसी की नक़ल करने से नही आती…
वो अदा जो उनके साथ जन्म लेती है…!! स्मिता गुप्ता की शख्सियत भी कुछ ऐसी ही है।

बिहार के गया जिले के शेरघाटी थाना क्षेत्र के दरबार हाउस इलाके में जन्मी स्मिता गुप्ता के पिता स्वर्गीय सुनील कुमार गुप्ता और मां श्रीमती इंदु गुप्ता ने बेटी को अपनी राह खुद चुनने की आजादी दे रखी थी।
बचपन के दिनों से ही स्मिता काफी मेघावी थी और स्कूल में टॉप किया करती। स्मिता की रूचि गीत-संगीत और अभिनय की ओर थी। स्मिता स्कूल-कॉलेज में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शिरकत किया करती जिसके लिये उन्हें काफी प्रशंसा मिला करती। वर्ष 2002 में स्मिता शादी के अटूट बंधन में बंध गयी। स्मिता के पति श्री रंजीत गुप्ता जाने माने दवा व्यवसायी हैं जो हर कदम उन्हें सपोर्ट करते हैं। शादी के शुरूआती दौर में स्मिता गुप्ता को
ससुराल पक्ष की ओर से अधिक सपोर्ट नही मिला लेकिन स्मिता ने अपने व्यवहारसे सबों का दिल जीत लिया। कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं। इस बात को साबित कर दिखाया स्मिता गुप्ता ने  ।

जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना
सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना
कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें
बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना।

स्मिता गुप्ता यदि चाहती तो विवाह के बंधन में बनने के बाद एक आम नारी की तरह जीवन गुजर बसर कर सकती थी लेकिन वह खुद की पहचान बनाना चाहती थी।
शादी के बाद भी स्मिता ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2004 में स्मिता ने स्नातक की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद  वर्ष 2005 में प्रयाग यूनिवर्सिटी इलाहाबाद से बीएड की पढ़ाई पूरी की।

जुनूँ है ज़हन में तो हौसले तलाश करो
मिसाले-आबे-रवाँ रास्ते तलाश करो
ये इज़्तराब रगों में बहुत ज़रूरी है
उठो सफ़र के नए सिलसिले तलाश कर

वर्ष 2007 में स्मिता गुप्ता नालंदा जिले के बिहारशरीफ स्थित डीएभी स्कूल में बतौर शिक्षिका काम करने लगी।इस बीच स्मिता गुप्ता ने एमए भी किया।
करीब दो साल तक डीएभी स्कूल में बतौर शिक्षिका काम करने के बाद स्मिता अपने पति के साथ राजधानी पटना आ गयी और इशान इंटरनेशनल गर्लस स्कूल में
बतौर शिक्षिका काम करने लगी। लगभग एक साल तक इशान स्कूल में पढ़ाने के बाद स्मिता गुप्ता ने पारिवारिक कारणों से स्कूल छोड़ दी। इसके बाद वह अपने पति के बिजनेस में हाथ बंटाने लगी।

बेहतर से बेहतर कि तलाश करो
मिल जाये नदी तो समंदर कि तलाश करो
टूट जाता है शीशा पत्थर कि चोट से
टूट जाये पत्थर ऐसा शीशा तलाश करो

स्मिता गुप्ता की रूचि मॉडलिंग और फैशन की ओर भी बचपन से रही है। वर्ष 2016 में स्मिता गुप्ता के मित्रों ने बताया कि राजधानी पटना में मॉडलिंग हंट शो मिसेज ग्लोबल बिहार का आयोजन किया जा रहा है। स्मिता के मित्रो ने उनसे इस शो में शिरकत करने को कहा। पहले तो स्मिता ने मना कर दिया लेकिन बाद में उन्हें लगा कि यह अलग तरह का शो है। स्मिता ने खुद से अपनी ग्रुमिंग शुरू की। स्मिता ने शो में हिस्सा लिया। स्मिता भले ही शो की
विजेता नही बन सकी लेकिन उन्होंने मिसेज ग्लोबल बिहार फसर्ट रनर अप का खिताब अपने नाम कर लिया। स्मिता का मानना है कि जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना ,सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें ,बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना।

इसके बाद स्मिता गुप्ता को फैशन के प्रति समझ को देखते हुये उन्हें कई मॉडलिंग हंट शो में जज बनने का भी अवसर मिला है।

ज़िन्दगी की असली उड़ान अभी बाकी है,
ज़िन्दगी के कई इम्तेहान अभी बाकी है,
अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीं हमने,
अभी तो सारा आसमान बाकी है…

मिसेज ग्लोबल बिहार फसर्ट रनर अप बनने के बाद स्मिता गुप्ता ने कई मीडिया चैनल और प्रिंट मीडिया को इंटरव्यू दिये। स्मिता गुप्ता मीडिया के क्षेत्र में आकर्षित हो गयी और उन्होंने तय किया कि वह इस क्षेत्र में भी काम करेगी। स्मिता गुप्ता वर्ष 2017 से दूरदर्शन के महिला सशक्तीकरण को बढावा देने वाले शो एक मिट्टी धूप में बतौर एंकर जुड़ गयी और आज भी काम कर रही है।

सपने उन्ही के पूरे होते है, जिनके सपनो मे जान होती है.
पँखो से कुछ नही होता, ऐ मेरे दोस्त!! होसलो से ही तो उड़ान होती है
सपने उन्ही के पूरे होते है,

स्मिता गुप्ता ने हाल ही में अपनी दोस्त श्रीमती निशा सिंह के साथ मिलकर राजधानी पटना में नमस्ते श्री बुटिक खोला है जिसके लिये उन्हें काफी तारीफें मिल रही है। स्मिता नमस्ते श्री बुटिक को नये आयाम पर ले जाना
चाहती है। स्मिता अपने बुटिक को फ्रेंचाइजी के तौर पर विकसित करना चाहती है। स्मिता का कहना है कि बिहार प्रतिभा के मामले में किसी भी दूसरे राज्य से कम नहीं है। फिर चाहे वह फिल्‍म हो, फैशन हो या फिर कला का
क्षेत्र हर जगह बिहार के लोगों ने अपनी सफलता के झंडे गाड़े हैं।

स्मिता गुप्ता आज कामयाबी की बुलंदियों पर हैं लेकिन उनके सपने यूं ही नही पूरे हुये हैं यह उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है। स्मिता गुप्ता ने बताया कि वह अपनी कामयाबी का पूरा श्रेय अपने पति के साथ
माता-पिता , अपने दोस्तों और अपने दो बच्चों सम़ृद्धि और पार्थ को देती है जिन्होंने उन्हें हमेशा सपोर्ट किया है। स्मिता गुप्ता ने बताया कि उन्हें अभिनय और घूमने का भी बेहद शौक है। स्मिताअपने परिवार के साथ वर्ल्ड टूर पर जाना चाहती है।

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