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सभी जीवित प्राणियों पर प्राकृतिक विकास के प्रचलित बुरे प्रभावों और बचपन के स्मरण का प्रतिबिंब : एच आर दास और दीपा दास की चित्र कला की जुबानी

सभी जीवित प्राणियों पर प्राकृतिक विकास के प्रचलित बुरे प्रभावों और बचपन के स्मरण का प्रतिबिंब : एच आर दास और दीपा दास की चित्र कला की जुबानी
सभी जीवित प्राणियों पर प्राकृतिक विकास के प्रचलित बुरे प्रभावों और बचपन के स्मरण का प्रतिबिंब : एच आर दास और दीपा दास की चित्र कला की जुबानी

सभी जीवित प्राणियों पर प्राकृतिक विकास के प्रचलित बुरे प्रभावों और बचपन के स्मरण का प्रतिबिंब : एच आर दास और दीपा दास की चित्र कला की जुबानी

कलाकार एच.आर. दास और दीपा दास काफी लंबे दशकों से भारत और विदेशों में विभिन्न प्रदर्शनियों के माध्यम से अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी सौंदर्यपूर्ण और प्रफुल्लित करने वाली “बुल” श्रृंखला ने पूरे कला क्षेत्र के आंतरिक मन में एक मूल्यवान स्थान प्राप्त कर लिया है।

उनका आगामी प्रदर्शनी ( पैराडाइश लॉस्ट)paradise lost जो 7 मई 2019 से 13 मई 2019 तक जहांगीर आर्ट गैलरी में आयोजित किया गया है, एक बहुत ही नई श्रृंखला का अनावरण करेगा जो सभी जीवित प्राणियों पर प्राकृतिक विकास के प्रचलित बुरे प्रभावों और बचपन के स्मरण के प्रतिबिंब दोनों का संकेत दे रहा है।

 

बचपन की खूबसूरत मासूमियत का पतन को भी दिखाया हैं ।  सभी चित्रों के रंग संयोजन और विषय नई पीढ़ियों के लिए एक विशेष सार्थक संदेश को प्रकाशीत कर रहा हैं। उनके साथ उनकी अर्द्धागिनी सुश्री दीपा दास भी अपनी नई श्रृंखला “पंचभुता” का प्रदर्शन करेंगी, जो नरम और शांत मिक्स मीडिया रंगों के त्रिकोणीय प्रिज्मीय खेल की अपनी अनूठी अभिनव ज्यामितीय रचना है।

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