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विष्णु शंकर बेलू ने भोजपुरी के कुछ सेलेब्रिटीज पर उनके द्वारा किये कारनामो पर उठाए सवाल

विष्णु शंकर बेलू ने भोजपुरी के कुछ सेलेब्रिटीज पर उनके द्वारा किये कारनामो पर उठाए सवाल
विष्णु शंकर बेलू ने भोजपुरी के कुछ सेलेब्रिटीज पर उनके द्वारा किये कारनामो पर उठाए सवाल

विष्णु शंकर बेलू ने भोजपुरी के कुछ सेलेब्रिटीज पर उनके द्वारा किये कारनामो पर उठाए सवाल


भोजपुरी सिनेमा के जाने माने निर्देशक व अभिनेता विष्णु शंकर बेलू ने भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री के कुछ खाश सेलेब्रिटीजो के कारनामों का किया खुलासा कहा ये सिर्फ नाम के स्टार है , उन्होंने कहा की मैं तो विवादों से दूर ही रहना पसंद करता हूँ, पर बात दिल को लगे तो ख़ामोशी ठीक नही। इस आपदा में कई लोगों का साथ छूटा मन व्यथित है।पिछले दिनों  संगीतकार धनंजय मिश्रा का मुम्बई में देहांत हो गया था, जिन्होंने  न जाने कितने सितारों का सितारा जगमग किया, जिनका परिवार गाजीपुर में है, उनके श्रद्ध कर्म तो छोड़िए कुछ को छोड़ उनके परिवार से मिलने तक नही गए है ये स्टार  तथा चर्चित फिल्म निर्देशक अनिल अजिताभ  जिन्होंने कई सफल फिल्मों का निर्देशन किया उनका परिवार पटना में ही है। ये हमारे भोजपुरी सिनेमा परिवार के अभिन्न अंग रहे है और अपने परिवार के एकमात्र कर्ता-धर्ता।  

   व्यथा तब और बढ़ जाती है जब इनके मजबूर परिवार को नजर अंदाज कर पब्लिसिटी के झूठे आडम्बर में एक सम्पन्न परिवार को सहानुभूति देते सोशल मीडिया पर उन सितारों की तस्वीरे दिखती है जिनसे उनका दूर दूर तक कोई नाता नहीं।    ऐसे में दिनकर की कविता की वो पंक्ति याद आती है…कि “जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मार जाता है”    कहना यही चाहता हु की सहानुभूति के लीये नजरिया एक जैसा ही होना चाहिये। ज्ञानियों ने कहा है ,  जब आग अपने घर मे लगी हो, तो बाराती में भोज नही घर की आग पहले बुझानी चाहिए।

मठाधीशों पर वैसे ही ग्रहण चल रहा है थोड़ा सम्भल के ये पब्लिक है बेटा जब चढ़ाती है तो बहुत ऊपर तक ले जाती है और जब पटक के गिराती है तो वो किसी से छुपा नही     मुझे लगता है कि रहस्य से पर्दा उठ चुका है, अंधी गुफा में भटकती अब जनता को भी अपनी आँखे खोल लेनी चाहिये और नकली शेर के खाल को उतार फेक उसे बेनकाब करना चाहिये।


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