Archive - February 2018

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अधिवक्ता बनना चाहती थी नमिता सिंह

अधिवक्ता बनना चाहती थी नमिता सिंह खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है, जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है, लहरों की ख़ामोशी को...